विवाह विच्छेदः एक सामाजिक अध्ययन
खोमन लाल साहू
अतिथि व्याख्याता, शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कर्वधा, जिला-कबीरधाम (छ.ग.)
*Corresponding Author E-mail:
ABSTRACT:
प्रस्तुत शोधपत्र छत्तीसगढ़ के दुर्ग संभाग में "दंपत्तियों में होने वाले विवाह विच्छेद" के कारणों, समस्या एवं विवाह-विच्छेद को रोकने के सामाजिक एवं कानूनी प्रयासों एवं उपायों पर अध्ययन किया गया है । यह शोध पत्र विवाह उपरांत 0-5 वर्ष के भीतर होने वाले विवाह विच्छेद को ज्ञात करने के लिए एक पायलेट सर्वे पर आधारित है, जिसमें प्राथमिक आंकड़ों के लिए साक्षात्कार अनुसूची एवं अवलोकन के माध्यम से 50 उत्तरदाताओं (25 महिला एवं 25 पुरूष) जिनका विवाह विच्छेद सामाजिक या कानूनी रूप से हो गया है, का चयन किया गया है । उत्तरदाताओं से प्राप्त जानकारी के आधार पर सर्वाधिक विवाह विच्छेद 25-34 आयु वर्ग के विवाहित महिला-पुरूष है तथा दूसरे क्रम में 18-24 आयु वर्ग के विवाहित महिला-पुरूष है । वहीं विवाह विच्छेद के कारणों में सर्वाधिक विवाहित महिला-पुरूष में संप्रेक्षण का अभाव, आर्थिक समस्या, भावनात्मक लगाव की कमी, एक-दूसरे पर विश्वास की कमी, निराशापन इत्यादि कमी होनी सम्मिलित है ।
KEYWORDS: विवाह-विच्छेद, चुड़ी पहनाना ।
INTRODUCTION:
विवाह-विच्छेद एक गंभीर सामाजिक समस्या बनता जा रहा है । भारत जैसे देश में विवाह-विच्छेद से दुनिया के कई समाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, इससे पारिवारिक विघटन, व्यक्तिगत तनाव, सामाजिक तालमेल इत्यादि अनेक प्रकार की समस्याएं लोगों के जीवन स्तर को प्रभावित करता है । 21वीं शताब्दी के दूसरे दशक में भारत में विवाह-विच्छेद की दर में अधिक दर्ज किया गया है । विवाह-विच्छेद एक व्यक्तिगत समस्या अवश्य प्रतीत होता है किन्तु इसका दुष्प्रभाव पूरे परिवार, रिश्तेदार एवं समाज पर भी पड़ता है । प्रस्तुत शोध पत्र में देश में बढ़ते विवाह-विच्छेद दर की स्थिति एवं कारणों को समझने में सहायक होगा जिससे पूर्व एवं वर्तमान के कारणों का तुलनात्मक अध्ययन करने में एक सेतु का कार्य करेगा । संबंध विच्छेद से संबंधित तथ्यों के समझने में सहायक होगा एवं उन समस्याओं से संबंधित सुझावों तथा समाधान हेतु उपयुक्त उपायों को खोजने में सहायक होगा ।
राष्ट्रीय स्तर पर विवाह-विच्छेद की दर के क्षेत्रीय आंकड़ों में वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि हो रही है । एक अनुमान के अनुसार पूर्व के दो दशकों में विवाह-विच्छेद की दर दोगुना से अधिक हो गया है । “दिल्ली, मुम्बई और बैंगलुरू जैसे शहरों में विवाह-विच्छेद की दर 30 प्रतिशत से अधिक है । दिल्ली, बैंगलुरू, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ जैसे स्थानों पर हाल के कुछ वर्षों में विवाह-विच्छेद के आवेदनों में नाटकीय रूप से वृद्धि दर्ज किये गये हैं ।“1 बड़े शहरों का यह दुष्प्रभाव अब छोटे शहरों, कम आबादी वाले राज्यों पर भी इसका प्रभाव स्पष्टतः देखा जा रहा है । यहाँ देश के 10 राज्यों में सर्वाधिक विवाह-विच्छेद की स्थिति को स्पष्ट किया गया है, यथा-
तालिका क्रमाँक - 1: भारत के शीर्ष दस राज्यों में संबंध-विच्छेद की स्थिति (2021-22)2
|
क्र. |
राज्य |
वर्ष में कुल विवाह-विच्छेद का प्रतिशत |
|
1. |
महाराष्ट्र |
18.7 |
|
2. |
मध्यप्रदेश |
18.7 |
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3. |
कर्नाटक |
11.7 |
|
4. |
उत्तरप्रदेश |
8.8 |
|
5. |
पश्चिम बंगाल |
8.2 |
|
6. |
दिल्ली |
7.7 |
|
7. |
तामिलनाडू |
7.1 |
|
8. |
तेलंगाना |
6.7 |
|
9. |
केरल |
6.3 |
|
10. |
बिहार |
6.1 |
वर्तमान में विवाहित महिला-पुरूषों को किसी-न-किसी कारणों से तनाव के चलते विवाह-विच्छेद के लिए बड़ी संख्या में आवेदन किया जा रहा है । छत्तीसगढ़ में भी इसका प्रभाव प्रत्यक्ष रूप से देखा सकता है, हालांकि जनजातीय समूहों में विवाह-विच्छेद का प्रभाव अत्यंत नगण्य है किन्तु मैदानी शहरी क्षेत्रों में इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से दृष्टगोचर हो रहा है । पिछले 1 वर्ष 6 माह की बात करें तो छत्तीसगढ़ के परिवार न्यायालय में 2647 संबंध विच्छेद के नये मामले न्यायालय में आये हैं । केवल रायपुर न्यायालय में ही 4019 मामले लंबित है । यह केवल एक जिले की स्थिति है जो न्यायालय तक पहुंचे हैं जिनमें सुलह की गुंजाइश बरकरार रहती है अर्थात् 40 प्रतिशत मामले न्यायालय तक आते हैं जबकि 60 प्रतिशत देश में सामाजिक रूप से सुलह या समझौता कराया जाता है जिसमें महिला सर्वाधिक संख्या में अपने माता-पिता के पास भेज दिया जाता है । ऐसे में इस वर्ग की महिलाओं की जीवन चिंतनीय हो जाती है और इनका पुनर्विवाह कराना एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है । हालांकि छत्तीसगढ़ में पुनर्विवाह को “चुड़ी पहनाना” भी कहा जाता है । यह एक सामाजिक परम्परा है जिसके माध्यम से जिस महिला का पूर्व में विवाह-विच्छेद हो गया होता है उसे कोई विवाह-विच्छेद वाला पुरूष दोनों परिवार की सहमति एवं सामाजिक व्यक्तियों के समक्ष चुड़ी पहनाकर, मांग में सिंदूर भरकर पत्नि के रूप में स्वीकार करता है ।
छत्तीसगढ़ के मैदानी क्षेत्र में 3 बड़े संभाग (बिलासपुर, दुर्ग एवं रायपुर) आते हैं, यहाँ प्रतिवर्ष औसतन 6000 विवाह-विच्छेद के लिए न्यायालय के समक्ष आ रहे हैं । यह विवाह के मात्र 6 माह से 3 वर्ष के मध्य में विवाह टुटने के कगार पर पहुँच रही है जो पारिवारिक-सामाजिक रूप से अत्यंत विचारनीय समस्या है । छत्तीसगढ़ में अभी 20 जिलों में परिवार न्यायालय है । “रायपुर परिवार न्यायालय में रायपुर के अतिरिक्त देवभोग, गरियाबंद, महासमुंद, मनेन्द्रगढ़, जशपुर, अंबिकापुर, बालोद, बलौदा-बाजार, बेमेतरा, बिलासपुर, धमतरी, जगदलपुर, जांजगीर-चांपा, कबीरधाम, रायगढ़, राजनांदगाँव एवं सूरजपुर में परिवार न्यायालय है ।“3 राज्य में प्रत्येक माह औसतन 1100 से अधिक विवाह-विच्छेद के मामले दर्ज हो रहे हैं अर्थात् एक वर्ष में 12 हजार से अधिक दंपत्ति (परिवार) कानूनी रूप से पृथक हो रहे हैं
रायपुर परिवार न्यायालय के अनुसार4:
रायपुर परिवार न्यायालय में दर्ज विवाह-विच्छेद आवेदनों की स्थिति (जनवरी 2021 से मार्च 2022)
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2021 |
2022 |
||||
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जनवरी |
217 |
जुलाई |
160 |
जनवरी |
233 |
|
फरवरी |
140 |
अगस्त |
173 |
फरवरी |
183 |
|
मार्च |
300 |
सितम्बर |
20 |
मार्च |
184 |
|
अप्रैल |
196 |
अक्टूबर |
305 |
|
|
|
मई |
- |
नवम्बर |
174 |
|
|
|
जून |
23 |
दिसंबर |
340 |
|
|
31 मार्च 2022 तक कुल लंबित केस – 4019.
शोध अध्ययन के उद्देश्य: प्रस्तुत शोध पत्र हेतु शोधार्थी द्वारा मुख्यतः उद्देश्य तैयार किये गये हैं, यथा-
1. विवाह-विच्छेद के संदर्भ में विवाह की आयु को ज्ञात करना ।
2. विवाह-विच्छेद के सामाजिक-आर्थिक स्थिति को ज्ञात करना ।
3. विवाह-विच्छेद के कारणों का अध्ययन करना ।
शोध-प्रविधि
प्राथमिक एवं द्वितीयक आंकड़े –
शोधार्थी द्वारा प्राथमिक आंकड़ों के संकलन के लिए साक्षात्कार अनुसूची व अवलोकन पद्धति का प्रयोग किया गया है, साथ ही उत्तरदाताओं से संबंधित रिश्तेदारों, मित्र, सहकर्मी, पड़ोसियों से भी विचार-विमर्श कर प्रतिवेदन तैयार किया गया है । द्वितीयक समंकों के लिए शासकीय एवं गैर-शासकीय दस्तावेज, समाचार पत्र-पत्रिकाओं, शोधपत्रों एवं इंटरनेट इत्याति का प्रयोग किया गया है ।
निदर्शन -
निदर्शन हेतु शोधार्थी द्वारा दुर्ग संभाग के 5 जिले (दुर्ग, राजनांदगाँव, बालोद, कवर्धा, बेमेतरा) से 10-10 विवाह-विच्छेद हो चुके महिला-पुरूषों को शामिल किया गया है । इसमें ऐसे उत्तरदाता शामिल हैं जिनकी आयु 18-35 के मध्य है और इनके विवाह की अवधि 6 माह से 5 वर्ष के मध्य है, के पश्चात विवाह-विच्छेद के लिए सामाजिक अथवा परिवार न्यायालय में आवेदन किये गये थे । जिनमें अधिकांश उत्तरदाताओं का निराकरण (संबंध-विच्छेद) हो गया है । इनका चयन असंभावित दैव निदर्शन पद्धति से किया गया है ।
उत्तरदाताओं का चयन
|
क्र. |
जिला |
उत्तरदाता |
||
|
महिला |
पुरूष |
योग |
||
|
1. |
दुर्ग |
06 |
04 |
10 |
|
2. |
राजनांदगाँव |
05 |
05 |
10 |
|
3. |
बालोद |
06 |
04 |
10 |
|
4. |
कवर्धा |
07 |
03 |
10 |
|
5. |
बेमेतरा |
04 |
06 |
10 |
|
योग |
28 |
22 |
50 |
|
उत्तरदाताओं से प्राप्त तथ्यों का विश्लेषण:
उत्तरदाताओं की आयु: कानूनी तौर पर विवाह करने की एक निश्चित आयु तय किया गया है । हमारे देश में विवाह के लिए न्यूनतम आयु सीमा 18 वर्ष (लड़कियों) तथा 21 वर्ष (लड़कों) तय किया गया है, इससे पूर्व विवाह की स्थिति के बाल विवाह की श्रेणी में रखते हैं । शोधार्थी द्वारा विवाह-विच्छेद से संबंधित उत्तरदाताओं की आयु सीमा को ज्ञात करने का प्रयास किया गया है ।
विवाह-विच्छेद के सन्दर्भ में उत्तरदाताओं के विवाह की आयु
|
क्र. |
आयु वर्ग |
संख्या |
प्रतिशत |
|
1. |
18-23 |
07 |
17.5 |
|
2. |
24-27 |
13 |
32.5 |
|
3. |
28-31 |
27 |
67.5 |
|
4. |
32-35 |
03 |
7.5 |
|
योग |
50 |
100 |
|
उपरोक्त तालिका से स्पष्ट होता है कि दुर्ग संभाग के चयनित उत्तरदाताओं में विवाह-विच्छेद के सन्दर्भ में विवाह की आयु की स्थिति को दर्शाया गया है, जिसमें 18-23 आयु वर्ग के मध्य विवाहित उत्तरदाताओं की संख्या 13 है जो कि न्यादर्श उत्तरदाताओं की कुल संख्या का 32.5 प्रतिशत है । 24-27 आयु के मध्य विवाहित उत्तरदाताओं की संख्या 27 है जो को न्यादर्श उत्तरदाताओं की कुल संख्या का 67.5 प्रतिशत है । 28-31 आयु वर्ग के मध्य विवाहित उत्तरदाताओं की संख्या 7 है जो कि न्यादर्श उत्तरदाताओं की कुल संख्या का 17.5 प्रतिशत है । 32-35 आयु वर्ग के मध्य विवाहित उत्तरदाताओं की संख्या 3 है जो कि न्यादर्श उत्तरदाताओं की कुल संख्या का 7.5 प्रतिशत है ।
उपरोक्त विश्लेषण से ज्ञात होता है कि वर्तमान में विवाह-विच्छेद की स्थिति 28-31 आयु वर्ग के मध्य विवाहित दंपत्तियों के बीच अधिक हो रहा है, जिसका मुख्य कारण अधिक उम्र में विवाह होने से आपसी तालमेल का अभाव, सोशल मीडिया के प्रभाव में आकर अन्य किसी और व्यक्ति की ओर आकर्षित होना, टेलीविजन कार्यक्रमों में विवाह के उपरांत दोहरे रिश्ते जैसे तत्वों का धड़ल्ले से प्रस्तुति इत्यादि । वर्तमान में सोशल मीडिया और टेलीविजन का प्रभाव संचार क्रांति के फलस्वरूप युवा पिढ़ी इसकी चपेट में आ रहे हैं और नाटकीय रूपांतरण को अपने नीजि जिंदगी का हिस्सा बनाते जा रहे हैं जिससे कि संबंध-विच्छेद के मामलों में वृद्धि हो रही है ।
विवाह-विच्छेद के कारण:
वैसे तो एक दंपत्ति सामाजिक व कानूनी रूप से विवाह-विच्छेद करने का अधिकार है, परंतु दोनों के द्वारा विवाह-विच्छेद होने के कोई-न-कोई कारण अवश्य होता है । शोधार्थी द्वारा उत्तरदाताओं की सहायता से साक्षात्कार कर वस्तुस्थिति ज्ञात करने का प्रयास किया गया है, जो अग्रतालिका में वर्णित है –
उत्तरदाताओं में विवाह-विच्छेद के प्रमुख कारण
|
क्र. |
प्रमुख कारण |
संख्या |
प्रतिशत |
|
1. |
आयु अधिक होना |
6 |
12.0 |
|
2. |
संप्रेषण का अभाव |
4 |
8.0 |
|
3. |
सोशल मीडिया की लत |
17 |
34.0 |
|
4. |
आर्थिक समस्या |
9 |
18.0 |
|
5. |
शारीरिक समस्या |
8 |
16.0 |
|
6. |
अन्य |
6 |
12.0 |
|
योग |
50 |
100 |
|
उपरोक्त तालिका में विवाह-विच्छेद के प्रमुख कारणों को दर्शाया गया है, जिसमें सर्वाधिक 17 उत्तरदाताओं स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया की लत के कारण विवाह-विच्छेद की समस्या उत्पन्न हो रहा है, जो कि न्यादर्श उत्तरदाताओं की कुल संख्या का 34.0 प्रतिशत है । आर्थिक समस्याओं को विवाह-विच्छेद का कारण मानने वाले उत्तरदाताओं की संख्या 9 है जो कि न्यादर्श उत्तरदाताओं की कुल संख्या का 18.0 प्रतिशत है । शारीरिक समस्याओं के कारण संबंध विच्छेद करने वाले उत्तरदाताओं की संख्या 8 है जो कि न्यादर्श उत्तरदाताओं की कुल संख्या का 16.0 प्रतिशत है । एक-दूसरे की भावनाओं को अनदेखा करना अर्थात् संप्रेषण में कमी को विवाह-विच्छेद की कारण मानने वाले उत्तरदाताओं की संख्या 4 है जो कि न्यादर्श उत्तरदाताओं की कुल संख्या का 8.0 प्रतिशत है । अधिक आयु में विवाह करने व समय के साथ विभिन्न प्रकार के जिम्मेदारियों के कारण शारीरिक सुंदरता एवं आकर्षण में कमी के कारण पति-पत्नि एक दूसरे की आवश्यकताओं को पूर्ण करने में सक्षम नहीं हो पाते हैं जिससे समय के साथ विमुखता बढ़ने अथवा लगाव कम होने लगता है, जिससे वे एक-दुसरे से सामंजस्य नहीं कर पाते हैं और विवाह-विच्छेद को ही अंतिम विकल्प मानने वाले उत्तरदाताओं की संख्या 6 जो कि न्यादर्श उत्तरदाताओं की कुल संख्या का 12.0 प्रतिशत है । अन्य विभिन्न कारणों के अंतर्गत, यथा-परिवार के सदस्यों के साथ तालमेल का अभाव, अन्य किसी व्यक्ति द्वारा एक-दूसरे के बुराईयों व विवाह के पूर्व के बातों के बारे में पता लगना, पड़ोंसियों के बहकावे में आना अथवा अपने परिवार के मान-मर्यादा इत्यादि का खंडन कर स्वयं को ही सर्वोपरि रखना इत्यादि भावनाएं अथवा कार्य जो एक-दूसरे को आह करते हैं, को विवाह-विच्छेद के कारण मानने वाले उत्तरदाताओं की संख्या 6 है जो कि न्यादर्श उत्तरदाताओं की संख्या का 12.0 प्रतिशत है ।
उपरोक्त विश्लेषण से ज्ञात होता है कि वर्तमान में नव-विवाहित दंपत्तियों में विवाह-विच्छेद का प्रमुख कारण निम्न है, यथा- सोशल मीडिया (फेसबुक, व्हाट्सअप, इंस्टाग्राम सहित अन्य ऐसे प्लेटफार्म जिसमें सीधे बातचीज (Chats) कर सकते हैं सम्मिलित है) पर अधिक समय व्यतीत करना जिससे अन्य महिला-पुरूष के संपर्क में आने से स्वयं के पति/पत्नि से भावनात्मक लगाव कम होने से, पुरूषों के आर्थिक समस्याएं एवं शारीरिक कमजोरियाँ इत्यादि है, जिससे विवाह-विच्छेद की दर बढ़ रही है । विवाह-विच्छेद के संदर्भ में सार्थकता परीक्षण हेतु किये गये काई वर्ग परीक्षण में काई वर्ग का परिकल्पित मान 12.62 प्राप्त हुआ है जो कि स्वतंत्र कोटि (df) 5 पर सार्थकता स्तर 0.05 में सारणी मान 11.07 है, जो कि काई वर्ग के परिकल्पित मान 11.07 < 12.62 से कम है । अतः निष्कर्ष के रूप में यह कहा जा सकता है कि विवाह-विच्छेद में वर्तमान समय में दंपत्तियों की जीवन-शैली, सोशल मीडिया का दुरूपयोग, एक-दूसरे को पर्याप्त एवं वांछित समय न देना, आर्थिक एवं शारीरिक समस्याएं, संप्रेषण का अभाव अत्याधिक प्रभावी होते जा रहा है जिसके कारण दोनों एक-दूसरे के साथ आगे की जीवन नहीं गुजारना चाह रहे हैं जिससे विवाह-विच्छेद के मामलों में वृद्धि का प्रमुख कारण है ।
निष्कर्ष:
प्रस्तुत शोध पत्र में छत्तीसगढ़ राज्य के दुर्ग संभाग के नव-विवाहितों में विवाह-विच्छेद की स्थिति, समस्याओं एवं कारणों को समझने हेतु एक प्रयास है, जिसमें यह पाया गया कि सर्वाधिक दंपत्तियों में विवाह की आयु 25-35 वर्ष के मध्य है और विवाह के 6 माह से 5 वर्ष से कम समय अर्थात दोनों अवधि के मध्य विवाह-विच्छेद हुआ है । विवाह-विच्छेद के संदर्भ में सामाजिक अथवा कानूनी रूप से विवाह-विच्छेद को अंतिम परिणाम दिया गया है जिसमें ऊपर वर्णित समस्याएं एवं मुद्दे प्रमुख कारक हैं । संबंध विच्छेद के पश्चात दोनों में मानसिक तनाव, आर्थिक समस्याएं, भावनात्मक रूप से स्वयं को कमजोर अनुभव कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वर्तमान में बहुत से दंपत्ति पुनः विवाह के बारे में सोंच रहे हैं और यह असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि भूत अथवा वर्तमान में घटित घटनाएं भविष्य में नकारात्मक स्थिति उत्पन्न न कर दें । विवाह-विच्छेद होने से दोनों ही परिवारों का विघटन स्पष्ट दिखाई पड़ता है जो कि सशक्त समाज के निर्माण में सबसे बड़ी बाधा है ।
संदर्भ ग्रंथ-सूची :
1. विवाह-विच्छेद अधिनियम, 1869, पूजा लॉ हाउस, 2016.
2. विवाह-विच्छेद अधिनियम, 1869, युनिवर्सल लॉ पब्लिशर्स, 2015.
3. सामाजिक विघटन - मदनमोहन सक्सेना हिन्दुस्तान बुक हाउस कानपुर, 1975.
4. Methods in Social Research - Goode & Hutt, MC GRAW HILL BOOK COMPANY, NEW DELHI-1952.
5. समाजिक विघटन और भारत : श्री कृष्णदत्त भट, बिहार हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, कदमकुआँ, पटना.
6. Social Disorganization & Elliot & Merrill.
7. अपराधशास्त्र, सामजिक विघटन एवं दण्डशास्त्र, डॉ० रामनाथ शर्मा, राजहंस प्रकाशन, मेरठ-1963.
8. अपराध एवं समाज डॉ. धर्मवीर महाजन, डॉ. कमलेश महाजन - विवके प्रकासन नई दिल्ली-2006.
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Received on 10.08.2025 Revised on 11.09.2025 Accepted on 08.10.2025 Published on 14.11.2025 Available online from November 25, 2025 Int. J. of Reviews and Res. in Social Sci. 2025; 13(4):225-231. DOI: 10.52711/2454-2687.2025.00033 ©A and V Publications All right reserved
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